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पिंक सिटी में चला बुलडोजर, नजूल जमीन पर बनी सड़क पर कार्रवाई

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कॉलोनी में रास्ता बनाने पर प्रशासन सख्त, सिटी मजिस्ट्रेट-सीओ सिटी समेत कई विभागों की टीम रही मौजूद

कॉलोनाइजर का सवाल—कॉलोनी अवैध थी तो पहले सरकारी विभाग ने सड़क कैसे डाल दी? शिकायतों पर कार्रवाई कब?

शोएब खान

पीलीभीत। शहर की चर्चित पिंक सिटी कॉलोनी में नजूल भूमि पर बनाई गई सड़क पर आखिरकार प्रशासन का बुलडोजर चल गया। गाटा संख्या 758 में बनाई गई सड़क को प्रशासन ने ध्वस्त करा दिया। कार्रवाई के दौरान सिटी मजिस्ट्रेट, सीओ सिटी, कोतवाली पुलिस, विनियमित क्षेत्र के जेई और नगर पालिका की टीम मौजूद रही।

बताया जा रहा है कि पिंक सिटी कॉलोनी में कॉलोनाइजर मास्टर अहमद नबी की ओर से नजूल भूमि की गाटा संख्या 758 में सड़क डाली गई थी। प्रशासन ने इसे अवैध निर्माण मानते हुए कार्रवाई की। सड़क निर्माण को लेकर पहले से सवाल उठते रहे थे। मामला नदी क्षेत्र से जुड़े पर्यावरणीय नियमों को लेकर भी चर्चा में है।

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के आदेशों और संबंधित बाढ़ क्षेत्र नियमों के तहत नदी के आसपास निर्धारित क्षेत्र में निर्माण को लेकर प्रतिबंध लागू होते हैं। ऐसे में नदी के नजदीक सड़क निर्माण को लेकर भी सवाल उठाए गए थे।


कॉलोनी अवैध थी तो सरकारी विभाग ने पहले सड़क कैसे डाल दी?

बुलडोजर की कार्रवाई के बाद अब दूसरा सवाल भी सामने आया है। कॉलोनाइजर मास्टर अहमद नबी का कहना है कि कॉलोनी में पूर्व में भी डूडा विभाग की ओर से सड़क डाली गई थी। उनका सवाल है कि यदि कॉलोनी अवैध थी तो सरकारी विभाग ने वहां सड़क का निर्माण क्यों कराया? अब उसी कॉलोनी में बनी सड़क को लेकर प्रशासन कार्रवाई कर रहा है।

 कॉलोनाइजर के इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि और सड़क निर्माण से संबंधित अभिलेखों की स्थिति स्पष्ट होना बाकी है। हालांकि, उनका सवाल प्रशासनिक विभागों की भूमिका को लेकर जरूर चर्चा में आ गया है।

सरकारी जमीन पर बुलडोजर, शिकायतों पर कब कार्रवाई?

पिंक सिटी को लेकर पूर्व में भी कई शिकायतें सामने आने की बात कही जा रही है। शिकायतकर्ताओं की ओर से कॉलोनी के निर्माण, रास्तों और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर अधिकारियों से शिकायतें किए जाने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने के सवाल उठ रहे हैं।

ऐसे में अब लोगों के बीच यह सवाल भी चर्चा में है कि प्रशासन की कार्रवाई का दायरा सिर्फ सरकारी जमीन तक ही क्यों सीमित रहे? यदि कॉलोनी के संबंध में पूर्व में शिकायतें मिली थीं तो उनकी जांच का नतीजा क्या रहा? क्या संबंधित विभागों ने कॉलोनी के नक्शे, भूमि की स्थिति और निर्माण की वैधता की कभी समग्र जांच की?

बुलडोजर चला, लेकिन सवाल अभी बाकी

पिंक सिटी में सड़क पर चला बुलडोजर फिलहाल एक निर्माण को तो हटा गया, लेकिन कार्रवाई ने कई पुराने सवाल फिर सामने ला दिए हैं। यदि निर्माण नियमों के विपरीत था तो निर्माण शुरू होने से पहले संबंधित विभागों की निगरानी कहां थी? और यदि कॉलोनी पहले से ही अवैध घोषित थी तो वहां सरकारी विभागों की ओर से सड़क समेत अन्य विकास कार्य किस आधार पर किए गए?

अब निगाह इस बात पर है कि प्रशासन सिर्फ नजूल भूमि से निर्माण हटाने तक कार्रवाई सीमित रखता है या पूरी कॉलोनी की भूमि, नक्शे, निर्माण अनुमति, सरकारी विभागों की भूमिका और पूर्व शिकायतों की भी जांच कर जिम्मेदारी तय करता है। यही कार्रवाई की असली कसौटी होगी।

सिटी मजिस्ट्रेट प्यारेलाल मौर्य ने बताया शहर की पिंक सिटी में नया निर्माण का किया जा रहा था जिसका लेआउट और नक्शा पास नहीं था और जिसमें नगर पालिका और नजूल की जमीन भी शामिल थी जिसे व्यक्तिगत जमीन बात कर रास्ता निकाला गया था उसे हटाने की कार्यवाही की गई। और आगे आसपास की जमीन की भी जांच की जाएगी कितनी सरकारी जमीन है और किसका नक्शा पास हुआ है उसी के आधार पर आगे भी कार्यवाही जारी रहेगी।

 

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